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चांद पर 2 साल पहले आखिर क्या हुआ था? 728 फीट का गड्ढा देखकर वैज्ञानिकों के उड़े होश

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Sep 17, 2026 08:38 am IST,  Updated : Sep 17, 2026 08:38 am IST

वैज्ञानिकों ने चांद पर 728 फीट चौड़ा और 141 फीट गहरा नया इंपैक्ट क्रेटर खोजा है, जो करीब 2 साल पहले बना था। यह हाल के समय का सबसे बड़ा ज्ञात क्रेटर है। टक्कर ने 100 किलोमीटर से भी ज्यादा बड़े इलाके को प्रभावित किया है।

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नासा के वैज्ञानिकों ने चांद पर एक विशाल गड्ढा खोजा है। Image Source : AP

Highlights

  • चांद पर 728 फीट चौड़ा विशाल क्रेटर मिला, पिछले रिकॉर्ड से 3 गुना बड़ा है।
  • क्षुद्रग्रह की टक्कर से बना गड्ढा 2 साल बाद वैज्ञानिकों को नजर आया।
  • नई खोज भविष्य के मून बेस की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

केप कैनावेरल: वैज्ञानिकों ने चांद पर एक विशाल नए गड्ढे या क्रेटर की खोज की है, जो रोमन कोलोसियम से भी बड़ा है। खास बात यह है कि यह गड्ढा करीब 2 साल पहले एक बेहद शक्तिशाली टक्कर से बना था, लेकिन उस समय इसका पता नहीं चल सका था। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह हाल के समय में सौरमंडल में खोजा गया सबसे बड़ा ज्ञात 'इंपैक्ट क्रेटर' है। यह खोज बुधवार को 'साइंस अडवांसेज' जर्नल में प्रकाशित 2 अलग-अलग स्टडी में सामने आई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इतनी बड़ी टक्कर की घटना औसतन हर 132 साल में सिर्फ एक बार हो सकती है, इसलिए यह खोज चांद को समझने के लिए बेहद दुर्लभ मौका है।

728 फीट चौड़ा और 141 फीट तक गहरा है गड्ढा

नासा के लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटर (LRO) ने मई 2024 में चांद के उस हिस्से पर यह गड्ढा देखा, जो पृथ्वी से दिखाई देता है। यह गड्ढा किसी क्षुद्रग्रह या धूमकेतु के टूटे हुए टुकड़े के चांद से टकराने के बाद बना था। गड्ढा करीब 728 फीट या लगभग 222 मीटर चौड़ा और 141 फीट या लगभग 43 मीटर तक गहरा है। इसका नाम दिवंगत वैज्ञानिक थॉमस मैकगेटचिन के नाम पर रखा गया है। वह ह्यूस्टन स्थित लूनर एंड प्लेनेटरी इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक थे। यह गड्ढा LRO द्वारा करीब एक दशक पहले खोजे गए पिछले रिकॉर्ड वाले गड्ढे से 3 गुना बड़ा है।

टक्कर से 100 किलोमीटर तक सतह हिल गई

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस टक्कर का असर सिर्फ गड्ढे तक सीमित नहीं रहा। इसने चांद की सतह को 100 किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र तक प्रभावित किया। टक्कर के कारण धूल और चट्टानी मिट्टी अनुमान से कहीं ज्यादा ऊंचे कोण पर दूर तक उछल गई। LRO के कैमरों के प्रमुख वैज्ञानिक और 'इंट्यूटिव मशीन्स' से जुड़े मार्क रॉबिन्सन इस अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं। उन्होंने बताया कि यह घटना वैज्ञानिकों के लिए बेहद दुर्लभ और जीवन में एक बार मिलने वाले अवलोकन जैसी है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने लिखा,

'यह घटना सांख्यिकीय रूप से बेहद दुर्लभ है और प्रभावी तौर पर जीवन में एक बार मिलने वाला अवलोकन है।'

चांद पर हुई टक्कर का पता 2 साल तक क्यों नहीं चला?

दिलचस्प बात यह है कि चांद पर इतनी बड़ी टक्कर हुई, लेकिन पृथ्वी और अंतरिक्ष में मौजूद दूरबीनें इसे उसी समय नहीं पकड़ सकीं। LRO ने मई 2024 में इस इलाके की वाइड-एंगल तस्वीरें ली थीं, लेकिन भारी मात्रा में मौजूद डेटा के बीच इन तस्वीरों में छिपी यह जानकारी तुरंत सामने नहीं आ सकी। अगस्त 2025 में वैज्ञानिकों ने इन तस्वीरों में नए गड्ढे की पहचान की। इसके बाद LRO ने पिछले जाड़े में इस जगह की और ज्यादा विस्तृत तस्वीरें लीं जिसके बाद इस खोज की पुष्टि इस साल की शुरुआत में हुई।

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Image Source : APभविष्य की खोजों के लिए यह क्रेटर बेहद खास है।

आसपास 7 किलोमीटर का ठंडा इलाका भी मिला

एक दूसरे अध्ययन में वैज्ञानिकों ने नए क्रेटर के आसपास करीब 7 किलोमीटर चौड़ा ठंडा क्षेत्र भी खोजा। यह संकेत देता है कि चांद की ऊपरी मिट्टी टक्कर के कारण ढीली और उलट-पुलट हुई है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिलिस (UCLA) के अध्ययन के सह-लेखक डेविड पेज ने इसकी तुलना बागवानी से की। उन्होंने कहा कि अब वैज्ञानिक प्रभावों को चांद की सतह की मिट्टी को 'बाग की मिट्टी की तरह पलटने' की प्रक्रिया के तौर पर देख रहे हैं। उनके मुताबिक, टक्कर से तलछट और मिट्टी लगातार उलट-पलट होती है और जो सामग्री आमतौर पर सतह के नीचे रहती है, वह ऊपर आ जाती है।

काफी तेजी से बदलती जा रही है चांद की मिट्टी

2009 में लॉन्च हुए LRO ने अब तक चांद पर बड़ी संख्या में नए क्रेटर खोजे हैं। इन खोजों से पता चलता है कि चांद की ऊपरी एक इंच यानी करीब 2 सेंटीमीटर मिट्टी उल्कापिंडों से उछलकर आई सामग्री के कारण हर 80,000 साल में पलट जाती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह प्रक्रिया पहले लगाए गए अनुमानों की तुलना में ज्यादा तेजी से हो रही है। इसका एक दिलचस्प असर यह भी है कि चांद पर अपोलो मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के छोड़े गए पैरों के निशान हमेशा बने रहने वाली बात सही नहीं है। रॉबिन्सन ने कहा कि इस समय-सीमा में वे निशान 'निश्चित रूप से बहुत पहले गायब हो चुके होंगे।'

भविष्य के लिए आखिर क्यों अहम है यह खोज?

यह खोज ऐसे समय हुई है जब नासा चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बेस बनाने की तैयारी कर रहा है। वैज्ञानिक अब यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि भविष्य में ऐसी टक्करों से उछली चट्टानें और मलबा चांद पर मौजूद किसी बेस तक पहुंचकर कितना खतरा पैदा कर सकता है। रॉबिन्सन के मुताबिक, अगला कदम यह गणना करना है कि क्रेटर से बाहर निकली सामग्री के नासा के प्रस्तावित मून बेस से टकराने का जोखिम कितना है। यह जानकारी इंजीनियरों को ऐसी संरचनाएं तैयार करने में मदद करेगी जिन्हें संभावित टक्करों से ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके। (AP से इनपुट्स के साथ)

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